Wednesday, 30 January 2013

जिला अस्पताल


1-
District Hospital
Sultanpur
2.Astha Hospital & Heart Center
Gola Ghat, Gomti Nagar, Sultanpur
Phone: 05362-240017, Mobile: 9415046034
Working Hours: 24 Hours
Estd: 2000
Owner: Dr. K.C. Tripathi, Dr. Manjula त्रिपाठी
3.Gomti Hospital & Research Center Pvt. Ltd.
Gomti Nagar East, Faizabad Road, Sultanpur
Dr. R.A. Verma M.D
Phone: 05362-241406, 9307123871
4.Suman Hospital
Gomti Nagar, Golaghat, Sultanpur
Director: Mrs. Suman Singh
Phone: 05362-223416
Website: www.sumanhospital.कॉम
5.Karunashraya Hospital
Sultanpur
Phone: 05362-222511
6.Sharan Hospital & Trauma Center
Allahabad Road, Luxmanpur, Sultanpur
Dr. Siddhartha Sharan M.S. (Ortho)
Dr. Siddhesh Sharan M.S. (Surgery)
Phone: 05362-240818, 9307123729
7.Jaslok Nursing Home & Infertility Center
Near Rahul Chauraha, Lohramau Raod, Sultanpur
Phone No.: +915362-240108
Mobile: +91-9792057089, +91-9451149307
Dr. B.K. Shukla (Director)
8.Sunder Devi Eye Hospital
Dariyapur, Sultanpur
Phone No.: +915362-240384
9.Sultanpur Hospital & Research Center
Golaghat, Sultanpur
10.Lifeline Hospital
Sultanpur
11.Mamta Hospital
Allahabad Road, Sultanpur
12.Navjeevan Hospital
Allahabad Road, Luxmanpur, Sultanpur
13.Vandana Hospital
Jaunpur Road, Payagipur, Sultanpur
14.Gaurav Charitable Hospital
Allahabad Road, Sultanpur
15.City Nursing Home
Near HDFC Bank, Allahabad Road, Sultanpur


ajay shukla 

नगर पालिका


इस जगह की स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी


सुंदर लाल स्मारक, धूपप, कोटव, विजेथा, देवलोक और लोहरामऊ यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं। गोमती नदी के तट पर स्थित इस जगह को कुशपुर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस जगह की स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी। इस जिले का मुख्यालय सुल्तानपुर शहर है। सुल्तानपुर 12वीं शताब्दी में मुस्लिम शासकों के अधीन था। यह जिला फैजाबाद जिले के उत्तर, प्रतापगढ् जिले के दक्षिण, अजमगढ़ जिला, अम्बेडकर जिला तथा जौनपुर जिले के पूर्व और बाराबंकी जिला, रायबरेली जिले के पश्चिम से घिरा हुआ है।
क्या देखें
सुंदर लाल मेमोरियल हॉल
: सुंदर लाल मेमोरियल हॉल सुल्तानपुर जिले के क्रिस्ट चर्च के दक्षिणी दिशा की ओर स्थित है। इसका निर्माण महारानी विक्टोरिया की याद में उनकी पहली जयन्ती पर करवाया गया था। वर्तमान समय में इसे विक्टोरिया मंजिल के नाम से जाना जाता है। लेकिन अब इस जगह पर म्युनसिपल बोर्ड का कार्यालय है।
विजेथा: सुल्तानपुर स्थित विजेथा भगवान हनुमान को समर्पित मंदिर है। माना जाता है कि इस जगह पर हनुमान ने कलनेमी दानव का वध किया था। लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए जब हनुमान संजीवनी बूटी लेने के लिए गए थे, तो रावण द्वारा भेजे गए कलनेमी दानव ने उनका रास्ता रोकने का प्रयास किया था। उस समय हनुमान जी ने कलनेमी दानव का वध किया था।
कोटव: यह एक धार्मिक स्थल है। कोटव को कोटव धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर में भगवान शिव की सफेद संगमरमर से बनी खूबसूरत प्रतिमा स्थित है। यहां मंदिर के समीप पर ही एक खूबसूरत सरोवर स्थित है। प्रत्येक वर्ष अक्टूबर और अप्रैल माह में यहां मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान काफी संख्या में भक्त इस सरोवर में स्नान करने के लिए आते हैं। 
धूपप: सुल्तानपुर जिले स्थित धूपप यहां के प्रमुख स्थलों में से है। माना जाता है कि यह वहीं स्थान है जहां भगवान श्री राम ने महर्षि वशिष्ठ के आदेशानुसार इस नदी में स्नान किया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति दशहरे के दिन यहां स्नान करता है उसके सभी पाप गोमती नदी में धूल जाते हैं। यहां एक विशाल मंदिर भी है। काफी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा के लिए आते हैं।
लोहरमऊ: यह जगह सुल्तानपुर शहर से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लोहरमऊ यहां के प्रमुख स्थलों में से है। इस जगह पर देवी दुर्गा का विशाल मंदिर स्थित है।
कोइरीपुर: यहां पर श्री हनुमानजी, भगवान राम और सीता, भगवान शंकर के काफी मंदिर है। इन मंदिरों का निर्माण स्थानीय लोगों ने मिलकर करवाया था। पूर्णिमा पर बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में काफी संख्या में लोग सम्मिलित होते हैं।
सतथिन शरीफ: प्रत्येक वर्ष यहां दस दिन के उर्स का आयोजन किया जाता है। शाह अब्दुल लातिफ और उनके समकालीन बाबा मदारी शाह उस समय के प्रसिद्ध फकीर थे। यहां गोमती नदी के तट पर शाह अब्दुल लातिफ की समाधि स्थित है।
कहां ठहरें
होटल विजयी
लोकेशन
: लाल दिग्गी,
सुल्तानपुर।
दूरभाष: 223092
मोहिनी गेस्ट हॉउस
लोकेशन
: बस स्टैंड रोड,
सुल्तानपुर।
दूरभाष: 240008
होटल पुष्पांजली
लोकेशन
: बरईयाबीर,
सुल्तानपुर।
दूरभाष: 224550
गार्डन व्‍यू गेस्ट हाऊस
लोकेशन
: 1162, सिरवारा रोड़,
सुल्तानपुर।
दूरभाष: 221399
गौरव गेस्ट हाऊस
लोकेशन
: रूद्र नगर,
सुल्तानपुर।
दूरभाष: 221399
कैसे जाएं
वायु मार्ग
: सबसे निकटतम हवाई अड्डा अम्हट, सुल्तानपुर है। एयरपोर्ट से सुल्तानपुर शहर पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: सुल्तानपुर रेलमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। नई दिल्ली, मुम्बई, हावड़ा और आस-पास के शहर आदि से एक्सप्रेस रलगाड़ी नियमित रूप से यहां के चलती है।
सड़क मार्ग: सड़कमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से सुल्तानपुर आसानी से पहुंचा जा सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 56 द्वारा लखनऊ, वाराणसी और इलाहाबाद आदि से सुल्तानपुर पहुंचा जा सकता है।
विभिन्न शहरों से दूरी
लखनऊ
: 141 किलोमीटर
वाराणसी: 180 किलोमीटर
इलाहाबाद: 96 किलोमीटर
एक नजर में
राज्य
: उत्तर प्रदेश
क्षेत्रफल: 4436 वर्ग किलोमीटर
भाषा: अवधी
एसटीडी कोड: 05362
घूमने का समय: नवम्बर से फरवरी


ajay

जाफराबाद-सुल्तानपुर रेलखंड पर बनेंगे 11 फ्लाईओवर


सुलतानपुर। जाफराबाद-सुल्तानपुर रेलखंड पर 11 फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। ये जानकारी उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एस. के. बुधलाकोटि ने दी। उन्होंने बताया कि जाफराबाद-सुल्तानपुर रेलखंड का विद्युतीकरण करने से पहले इन 11 फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा।
बुधलाकोटि ने कहा कि इस लाइन के सभी स्टेशनों के प्लेटफार्मो की ऊंचाई बढ़ाई जाएंगी।
उन्होंने इस रेलखंड के निरीक्षण के बाद बताया कि इस रेलखंड पर 300 किमी. दोहरीकरण कार्य के सापेक्ष 152 किमी. का काम पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली आम लोगों की समस्याओं एवं सुझावों पर भी कार्रवाई की जायेगी। सुल्तानपुर स्टेशन का सौन्दर्यीकरण एवं विस्तार होगा तथा दो नए प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। उन्होंने स्टेशन पर बनी कैन्टीन एवं पं.रामनरेश त्रिपाठी पुस्तकालय का लोकार्पण किया।

Tuesday, 16 October 2012

श्री दुर्गा चालीसा | दुर्गा माँ आरती


नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ।। 
निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली उजियारी ।। 
शशि ललाट मुख महा विशाला । नेत्र लाल भृकुटी विकराला ।। 
रुप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ।। 
तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ।। 
अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ।। 
प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ।। 
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रहृ विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ।। 
रुप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्घि ऋषि मुनिन उबारा ।। 
धरा रुप नरसिंह को अम्बा । प्रगट भई फाड़कर खम्बा ।। 
रक्षा कर प्रहलाद बचायो । हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो ।। 
लक्ष्मी रुप धरो जग माही । श्री नारायण अंग समाही ।। 
क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ।। 
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ।। 
मातंगी धूमावति माता । भुवनेश्वरि बगला सुखदाता ।। 
श्री भैरव तारा जग तारिणि । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ।। 
केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ।। 
कर में खप्पर खड्ग विराजे । जाको देख काल डर भाजे ।। 
सोहे अस्त्र और तिरशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ।। 
नगर कोटि में तुम्ही विराजत । तिहूं लोक में डंका बाजत ।। 
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ।। 
महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ।। 
रुप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ।। 
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ।। 
अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ।। 
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर नारी ।। 
प्रेम भक्ति से जो यश गावै । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे ।। 
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताको छुटि जाई ।। 
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ।। 
शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ।। 
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहू काल नहिं सुमिरो तुमको ।। 
शक्ति रुप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछतायो ।। 
शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ।। 
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ।। 
मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ।। 
आशा तृष्णा निपट सतवे । मोह मदादिक सब विनशावै ।। 
शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरों इकचित तुम्हें भवानी ।। 
करौ कृपा हे मातु दयाला । ऋद्घि सिद्घि दे करहु निहाला ।। 
जब लगि जियौं दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ।। 
दुर्गा चालीसा जो नित गावै । सब सुख भोग परम पद पावै ।। 
देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी ।। 

दुर्गा माँ आरती |  Maa Durga Aarti

ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते ॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ जय अम्बे गौरी ॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रबदन नीको ॥ जय अम्बे गौरी ॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै । रक्त पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै ॥ जय अम्बे गौरी ॥
केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्परधारी । सुर नर मुनिजन सेवक, तिनके दुखहारी ॥ जय अम्बे गौरी ॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ॥ जय अम्बे गौरी ॥
शुम्भ निशुम्भ विडारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ जय अम्बे गौरी ॥
चण्ड मुण्ड संघारे, शोणित बीज हरे । मधुकैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे ॥ जय अम्बे गौरी ॥
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ जय अम्बे गौरी ॥
चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरुं । बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु ॥ जय अम्बे गौरी ॥
तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता । भक्‍तन् की दुःख हरता, सुख-सम्पत्ति करता ॥ जय अम्बे गौरी ॥
भुजा चार अति शोभित, खड़ग खप्परधारी । मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ जय अम्बे गौरी ॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ॥ जय अम्बे गौरी ॥
श्री अम्बे जी की आरती, जो को‌ई नर गावै ।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै ॥ जय अम्बे गौरी ॥

जय माँ वैष्णो देवीsultanpur ki khabar -Welcome to Sultanpur sultanpur ki khabar -Welcome to Sultanpur

Monday, 15 October 2012

जय माँ वैष्णो देवी

विष्णु जी कि आज्ञा पाकर मुनिवर जी ने माँ लक्ष्मी माँ सरस्वती और माँ अम्बे का आवाहन किया और तीनो शक्तियो ने मिलकर अपनी शक्ति से एक नई शक्ति उत्पन कि और फिर माँ ने मुनिवर जी आज्ञा पाकर भगवान् विष्णु जी के पास गई और विष्णु जी ने अपना अंश प्रदान करके माँ को शेरावाली वैष्णो देवी का नाम दिया और काहा जाओ पाप का नाश करके पुण्य का प्रकाश फैलाओ ....और फिर माँ शेरावाली ने दैत्य राज का संहार किया ओर उसके बाद विष्णु जी ने काहा माँ को अब तुम दक्षिण दिशा की ओर जाओ और राजा रत्नाकर की पुत्री के रूप में जन्म लेकर धर्म की ध्वजा फैलाओ ....